Monday, 25 May 2020

Poem -Gujra Jamana

शीर्षक - गुजरा जमाना 

पीपल की ओ शीतल छाँव 
कौओं की ओ काँव-काँव 
बालपन की हाव-भाव
किसे याद है ?

आती बसंत की पहली बयार
आम्र मंजरियो का ओ स्वाद
कोयल की ओ मधुर स्वागत गान
किसे याद है ?

पूरे फागुन 
महुआ के पेड़ से गलबहियाँ 
अर्ध रात्रि की टप-टप छप-छप
किसे याद है ?

बारिश का मौसम 
हरफों में सिमटी बिजली 
तेल के दिये
इतवारी बाजार की ओ लंबी लाइन 
और लीटर भर तेल
किसे याद है ?

भादों का महीना
फिसलन भरी तालाब की मेंड
किसे याद है ?

सनसनाती अंधेरी रातों में 
झिंगुरों की आवाज 
मचान पर भूतों की कहानियाँ 
किसे याद है ?

बगिया का जामुन 
नीम का दातुन 
नदिया में आचमन 
ओ चना-गुड का जलपान
किसे याद है ?

और याद है वह
स्कूल के पिछवाड़े का
खोडर वाली इमली में 
छुपना नजर बचाकर,
खड़ी है अबतलक
इंतज़ार में
कि लौटेगा बचपन
धमा-चौकड़ी खट्टी-मीठी इमली के संग
कर गलबहियाँ साथ
जीने की राह तलाशेंगे ।
जीने की राह तलाशेंगे ।।

सादर। 
विकास प्रसाद 
प्रयागराज।

Child song- School Bag

आइए एक बाल-गीत पढ़े। यह स्कूल जाने वाले बच्चों की  मस्ती और मुश्किलों पर है।

शीर्षक -स्कूल का बस्ता

स्कूल का बस्ता
है कितना हँसता 
रखूँ इसमें खस्ता
हो जाएगा नाश्ता। 

चार पोथी इसमें आए
तीन मुझे खूब भाए
गणित मुझे बहुत रूलाए
हिन्दी मुझे बहुत भाए।

छः काॅपी इसमें रखूँ
बार-बार इन्हें देखूँ 
फिर जाचूँ फिर परखूँ
ड्राइंग काॅपी देख हरसूँ।

हैं इसमें चार खाने
इसके हैं बहुँत माने
एक में पेंसिल का बंच
दूजे में बक्सा भर लंच।

अब पानी का बोतल ले लूँ
भारी इतना झुक कर चलूँ 
सब मिलकर किलो आठ
चलते लगूँ उम्र साठ।

छुट्टी हुई बस्ता ले दौड़ा
बस्ता दरवाजा में अड़ा
पीछे से बच्चों ने धकडा
गिरते-पड़ते बस को पकड़ा। 

घर पहुँचते थक-कर चूर
खाना-खेलना भूलकर
होमवर्क की चिंता में आतुर
आखिर क्यों है हम इतने मजबूर ?
आखिर क्यों है हम इतने मजबूर ?

सादर। 
विकास प्रसाद 
प्रयागराज।

Saturday, 23 May 2020

Low level of water in Ganga River at Prayagraj- October 2019- A crisis

गंगा जी में पानी कम हो गया है। इलाहबाद के प्रितम नगर के पास गंगा किनारे छठ दर्शन करने के समय बच्चों ने कम पानी होने का आनन्द उठाया।

The Spring- poem

बसंत ऋतुराज 
बसंत ऋतुराज जाने जाते हैं।
इसी से सभी ऋतुओं में श्रेष्ठ माने जाते हैं।
सुर्य की किरने ही इनकी हथियार हैं।
इसी से शीत ऋतु पर विजय पाते हैं।
आशा लगाये हूँ कि
यह तेज किरणे
नई मुसीबत कोरोना
का प्राण
हर लेंगी।
मानव जाति पर छाई
संकट के बादल को उडाकर
अन्तरिक्ष मे विलीन
कर के ही मानेंगी।

Precaution from COVID-19

कोरोना से बचने के उपायों में से एक है-
संक्रमित व्यक्ति से अलग रहना और भीड़ भाड़ से दूर रहना।
रेल सफर में यह इस प्रकार सम्भव हो सकता है-
1. वेटिंग लिस्ट बन्द।
2. बिना टिकट बन्द।
3. चेयर कार बन्द।
4. स्टेशन पर गाड़ी आने के समय ही प्रवेश।
5. स्टेशन पर भीड़ लगाना बन्द।
6. अपनी अपनी बर्थ पर ही यात्री रहें।
7. एक दुसरे के विपरित पैर रख कर सोयें।
8. RAC बन्द।
9. General Ticket बंद ।
10. वेटिंग हाल बंद।
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Effect of Lock Down.

यह सुन्दर लान रेलकर्मीयो को अतिरिक्त ऊर्जा से भर देती थी जब मध्याह्न के समय कुछ पल यहाँ बिताते थे।पर यह अब सुनसान हो रही है ।

Lock down effect.

रेलकर्मियों के चहलकदमी से गुलजार रहने वाला कार्यालय प्रांगण अब उदास हो रहा है। अब समय है वर्क फ्रॉम होम का। यात्री गाडियाँ पहले ही बंद है अब ऑफ़िस भी । देश की लाइफ लाईन कही जाने वाली रेल कभी बंद हो सकती है ऐसा किसी ने सोचा भी नहीं होगा।