सफलता और बाधाओं का चोली-दामन का साथ है। बगैर बाधाओं के कौन सा कार्य पूरा हुआ है जो अब होगा। इतिहास बड़ी - बड़ी बलिदानो के उदाहरणों से भरा पड़ा है। हाँ बाधाओं के बारंबार आने से मन हतोसाहित अवश्य हो जाता है। ऐसे में आशा का एक संबल भी मन को उत्साह से भर देता है।
इस संबंध में एक उदगार-
शीर्षक -आशा का संबल
व्यथित मन
पा आशा का संबल
हो रहा धन्य-धन्य,
पुनः बटोरकर मन का साहस
जीवन समर में जुटेंगे अविलंब,
कदम -कदम पर कर संघर्ष
मंजिल जरूर पाएँगे।
लाख मुश्किलें हो राहों में
जीत जरूर हम जाएँगे । ।
पा आशा का संबल
हो रहा धन्य-धन्य,
पुनः बटोरकर मन का साहस
जीवन समर में जुटेंगे अविलंब,
कदम -कदम पर कर संघर्ष
मंजिल जरूर पाएँगे।
लाख मुश्किलें हो राहों में
जीत जरूर हम जाएँगे । ।
सादर!
विकास प्रसाद।
विकास प्रसाद।
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