Saturday, 23 May 2020

कोरोना योद्धा जान पर खेल कर मानवता की रक्षा में जुटे हैं। उन्हीं को समर्पित -


शीर्षक - कोरोना योद्धा
कर्तव्य पथ पर डटा हुआ
हिमालय की तरह अड़ा हुआ
कोरोना योद्धा हूँ।
बातें होती हैं
चिंताए भी हैं
पर कर्तव्य भारी है
इंसानियत के लिए यही हितकारी है।
कोरोना योद्धा हूँ।
कैद कुटुंब बंद किवाड़
करते रवि दर्शन रोशनदान
अर्ज करती बचपन
हरो कोरोना मुसीबत
घर आए खुशियाँ
लौटकर दुबारा
कोरोना योद्धा हूँ।
घर जाता हूँ देहरी तक
भर नजर देख लेता हूँ
हसरतें हमारी भी हैं
कोरोना योद्धा हूँ।
रोज सुबह चाय की प्याली
रह जाती है खाली
आती है अखबार
लिए समाचार बढते हजार
कर पाते नहीं विचलित
साहस अपार
कोरोना योद्धा हूँ।
कभी इन्सान भी
भयभीत मरण से
हो जाता है स्वार्थी
पर जीवन भी लंबी क्या?
जो भरा हो भय से
कोरोना योद्धा हूँ।
जानता हूँ
कि मयस्सर न होगी तुम्हारा कांधा
और न दोगे दो गज जमीन
गर हो जाएँ शहीद हम
कोरोना योद्धा हूँ।
अब गुजारिश है
न फेको पत्थर हम पर
इन्सानियत की खातिर
इन्सान होना
नसीब से नसीब होता है
जान यह जुटा हूँ
कोरोना योद्धा हूँ।
सादर।
विकास प्रसाद

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