Saturday, 23 May 2020

Gulmohar- Flower of Heaven- Poem

शीर्षक :- गुलमोहर -स्वर्ग का फूल
एक गुलमोहर
सड़क के उस पार,
लहक उठी है, लालिमा की चंदोवा तान
मद्धिम-मद्धिम हरितिमा के संग।
नज़र है सबकी
उस पर
पर उसकी नज़र है इधर, बस इधर।
मंडरा रहे हैं भ्रमर
जान बसंत
सीमा लान्घ
छिप के कोकिल तान तले।
एक गुलमोहर -
लेतीं उबासी, अलसायी
भोर भयी
रवि किरण की छाह संग,
फैलाती छटा भू-नभ।
चढ़ रही ग्रीष्म
लजा रहे शेष तरू, जान
रीत गये बसंत उनके,
चढ़ी परवान लालिमा
गुलमोहर - गुलनार के जब।
देखा इसने भी दुर्दीन पत्र-विहीन,
थे औरों के जब बसंत,
अब महफिल-महफिल दमक रही
इतराती-इठलाती,
बस गुलमोहर ही गुलमोहर ।
सादर ।
विकास प्रसाद.

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