हम अपनी खुशी व प्रशन्नता के लिए कई रचनात्मक कार्य करते हैं। गमले में फूल भी। पर गमले का फूल शायद ऐसा कुछ सोचता होगा -
शीर्षक - गमले का फूल
गमले का फूल हूँ
सँवारा गया
मालिक ने सहेजा है
दी है दिशा
जड़ों को बांध
गमले की सीमा तक।
सँवारा गया
मालिक ने सहेजा है
दी है दिशा
जड़ों को बांध
गमले की सीमा तक।
मेरी सुन्दरता पर
मालिक हो भावविभोर
भर जाता है खुशी से।
मालिक हो भावविभोर
भर जाता है खुशी से।
मेरी चाहत का क्या ?
नहीं आते यहाँ भ्रमर,
चुनमुन चिड़िया सुनाने मधुर गीत
और पथिक चुनने फूल
इष्ट देवता के लिए।
नहीं आते यहाँ भ्रमर,
चुनमुन चिड़िया सुनाने मधुर गीत
और पथिक चुनने फूल
इष्ट देवता के लिए।
गिर जाता हूँ गमले की मिट्टी में
सुखकर, फिर से खिलने,
वही जड़ वही सीमा
सुखकर, फिर से खिलने,
वही जड़ वही सीमा
नसीब नहीं मुक्त जलधारा
अम्बर की, और सरिता संग
मिल जाना दरिया में,
मुकाम-ए-मुक्कमल।
अम्बर की, और सरिता संग
मिल जाना दरिया में,
मुकाम-ए-मुक्कमल।
सादर।
विकास प्रसाद
विकास प्रसाद

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