Saturday, 23 May 2020

Railway aand Railway Men- Poem

भारतीय रेल भारत की जीवन रेखा, सुख-दुःख जीवन मरण सब में काम आ रही है। अतः इस संबंध एक उद्गार -
शीर्षक-रेल कर्मी और रेलवे
हम रेल कर्मी
रेल हमारी जीवन -रेखा ।
संरक्षा पूर्ण कार्य हमारा
करते नहीं नियमों को अनदेखा। ।
मेहनत करने में आगे हम
मुश्किलों से घबराते नहीं हम।
जागरूकता फैलाते हम
नवोन्मेष को बढ़ाते हम।।
वर्षा,गरमी, पूस की रात
दे नहीं पाए हमें आघात ।
पूरब, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण
गाड़ी संचालन दिन-रात। ।
हो दशहरा या दीवाली
स्टेशन पर ही मनती होली ।
सबको मंजिल पहुँचाते हम
मुश्किलों से कर अठखेली।।
ईमानदारी में आगे हम,
सहायता करने से कभी नहीं भागे हम।
सूखा, भूकंप, हो या महामारी
रेल बनी सदैव सहायता की सवारी। ।
हमारा परिवार अति विशाल,
धनी गरीब तंग फटेहाल।
सबका ध्यान रखते हम,
किसी को समझते नहीं कम।।
सवारी पैसेंजर मेल एक्सप्रेस
इनसे घूमें पूरा देश ।
अनेकता में एकता
कोई भाषा कोई परिवेश।।
है पर्यावरण के अनुकूल
बढ़ा रही है सुलह-ओ-कूल।
ईन्धन खपत में किफायती
किराया इसका बहुत रियायती। ।
सभी कष्टों को झेलती रेल
सुख से मंजिल पहुँचाती रेल।
लंबी-लंबी राहों को,
धड-धड पूरी करती रेल।।
रियायती दरों में नहीं कोई सानी
इससे हुआ खजाना पानी।
उस पर आया यह महामारी
छिपाना पड़ रहा है धन की लाचारी। ।
थमे हुए हैं पहिए हमारे
कम हुई हमारी आय।
खर्च बढते जा रहे हैं,
सूझता नहीं कोई उपाय। ।
रेल ने गाया है सदैव
मिलकर सुख-दु:ख के टेर ।
आशा है इसकी भी कोई
लेगा सेहत की खैर।।
सादर।
विकास प्रसाद

No comments:

Post a Comment